http://Vedic.by-choice.com के सहयोग से।
Wednesday, June 27, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
गीता भगवान् का ह्रदय है| उन्होंने स्वयं कहा है 'गीता मे ह्र्दयं पार्थ' यह सर्वशास्त्रमयी है, क्योंकि यह वेद-तत्तवार्थ का निचोड़ है|
http://Vedic.by-choice.com के सहयोग से।
Posted by
डॉ. राम चन्द्र मिश्र
at
8:40 PM
3 comments:
अच्छी तस्वीरें..बधाई.
बहुत सुन्दर तसवीरें हैं भाई. बधाई स्वीकारें.
समीर जी, और सांकृत्यायन जी आपका धन्यवाद।
Post a Comment