ओ३म् तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुन संवादेऽर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः।
Even if the sons of Dhritraashtra armed with weapons in hand slay me unarmed and unresisting on the battlefield, that would considered better for me.
यदि मुझ शस्त्र रहित एवं सामना न करने वाले को शस्त्र, हाथ मे लिये हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण मे मार डालें तो वह मरना भी मेरे लिये अधिक कल्याणकारक होगा॥४६॥

